"टैलेंट ,धैर्य एवं किस्मत"
वरुण ग्रोवर जिनका परिचय देने की कोई जरुरत महसूस नही होती, उनका नाम ही काफी है, वो किसी परिचय के मोहताज नही |
साहित्य के मंच पर कही गई ये लाइन बहुत से युवाओं को एक संदेश दे गई, की टेलेंट की परिभाषा असल में कुछ और ही है | ज्यादातर जब किसी सफल व्यक्ति से से सफलता का राज पूछा जाता है तो 2 ही बाते सुनने को मिलती है, 1 तो हार्ड मेहनत, और दूसरा बचपन से टेलेंट का होना| ये 'टेलेंट का होना' एक ऐसा शब्द है जो व्यक्ति को निराश कर देता है, वो दुसरे व्यक्तियों से अपने आप को कम महसूस करता है, या उसको समझ में ही नही आता की वाकई उनमें कुछ अनोखा है जो उसमें टेलेंट दिखा सके | में भी पहले यही सोचता था की कुछ लोग वाकई किस्मत वाले होते है जिनके अन्दर बचपन से ही टेलेंट होता है , हाँ अबतक तो में यही सोचता था |
लेकिन यूट्यूब पर जब उस INTERVIEW को देखा तो असल में सभी शब्दों का मतलब समझ में आया |
"टैलेंट ,धैर्य एवं किस्मत"
वरुण सर ने बहुत ही कम शब्दों में असल में इनका मतलब समझाया , सही मायने में देख जाये तो किस्मत अपने हाथ में नही होती | कोई व्यक्ति ये नही कह सकता की उसकी किस्मत बहुत अच्छी है जबतक उसके साथ कुछ गलत न घटित हो जाये | आप किसी भी व्यक्ति से पूछोगे की आपकी किस्मत अच्छी है तो उसका जबाब होगा पता नही अभी तक तो कुछ अच्छा नही हो रहा जिन्दगी में तो सही मायने में किस्मत को किस्मत के ऊपर ही छोड़ देते है |
धैर्य ही जीवन का सबसे कठिन कार्य है, क्योंकि यही वो समय होता है जब आपको अपने ऊपर पुरा विश्वास रखना होता है | हर पल आपको अपने आपको समझाना पड़ता है की अभी रुक अभी हम मंजिल के बहुत करीब है , मन का क्या वो तो भागेगा क्योंकि वो तो है ही चंचल, दिमाग आपको डराएगा, आपको दिखायेगा की अगर ये नही हुआ तो हम सबसे पिछड़ जायेंगे, हम उन असफल व्यक्तियों में आ जायेंगे जिनका मजाक ये दुनिया उड़ाती है | यही समय होता है जब हमें अपने दिमाग को विश्वास दिलाना होता है सब ठीक है बस अच्छे दिन आने वाले है, अपने दिमाग को उन सफल व्यक्तियों की जीवनी बताओ , उसे दिखाओं की कैसे उन्होंने बहुत बड़ा संघर्ष किया था अपनी पहचान बनाने के लिए और उन्होंने कैसे आखिर में अपनी पहचान बनाई थी |
टैलेंट सच में किसी भी व्यक्ति के पास कोई टैलेंट होता ही नही उसे ये सब मिलता है पड़कर, समझकर, और उस कार्य में अपनी अभिरुचि दिखाकर | असल में यही बात है जो मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है और जिस से में अनजान था | टैलेंट, को अलग से शब्द से देखा जाये तो जिस काम में आपका मन लगता है, जो काम सबसे ज्यादा अच्छा लगता है उसी को करना, उसी काम को अपने करियर के रूप में करना | जब आप अपने पसंदीदा काम को करते है तो आपका मन उस काम को अच्छी तरह और रूचि के साथ करता है |
ये लेख बहुत से मेरे जैसे युवाओं को एक प्रेरणा देगा की हमें अपने लिए काम करना है, किसी को खुश करने के लिए नही |
No comments:
Post a Comment